सच

सचसच के मायने बदल गए हैंहम बस दो सच ही समझते हैंपहले ही माना हुआ सचदूसरों को झूठलाता सचहमने अपने मन के एक तरफ कालीऔर एक तरफ सफेद स्याही पोत ली हैफिल्म में, टीवी में, इंटरनेट परसब जगह हमअपने माने हुए सच कोऔर सच बनाने केतरीक़े खोज रहे हैंताकि दूसरों की नज़रों मेंजब खुद कोContinue reading “सच”