राम रामलाल

वह चला था चौदह बरस तकअब उसे तुम चार दिवारी में बंद करउसके नाम पे लड़ कर धंधा खोलना चाहते होऔर उसे धर्म बताते होजब कर रहे हो उसका १००८ बार गुणगान टीवी के सामनेकोई रामलाल पैदल ही जा रहा है १००८ किलोमीटर अपने परिवार के पासतुम पूछते हो मैं तो घर में बैठकर क्याContinue reading “राम रामलाल”