राम रामलाल

वह चला था चौदह बरस तकअब उसे तुम चार दिवारी में बंद करउसके नाम पे लड़ कर धंधा खोलना चाहते होऔर उसे धर्म बताते होजब कर रहे हो उसका १००८ बार गुणगान टीवी के सामनेकोई रामलाल पैदल ही जा रहा है १००८ किलोमीटर अपने परिवार के पासतुम पूछते हो मैं तो घर में बैठकर क्याContinue reading “राम रामलाल”

सवाल करते रहो

कुछ साल पहलेशायद इमर्जेंसी के समयमेरे पापा कुछ १५ साल के रहे होंगेतब उनके एक दोस्त ने उन्हें एक कविता पढ़ने को दीओम प्रकाश वाल्मीकि कीमगर जैसे ही दादा ने देखा उन्होंने वह फट से छीन लीऔर कूड़े में फेंक दीऔर कहा यह सब मत पढ़ा करचल रामायण पढ़उसमें भी तो राम शबरी के झूठेContinue reading “सवाल करते रहो”