बुली भैया

बुली भैया9th में होंगेजब हम 4th में थेऑटो में उनका एक छत्र राज थाकोने वाली सीट पर बस उनका ही अधिकार थावह कूटनीती के ज्ञाता थेअंडरटेकर वाली कूटनीती केजब मौका मिलता हमें कूट देते थेऑटो में उनको बैग टच हुआ तोकूट दियाउनके जोक पर हम हंसे नहीं तबकूट दियाउनके लिए दो वाली पेप्सी नहीं लाएContinue reading “बुली भैया”

जान और संसद

एक आदमीजान से मर रहा हैएक आदमी जान बचा रहा हैएक तीसरा आदमी भी हैजो ना जान बचाता है, ना कोशिश करता हैवह सिर्फ़ दूसरों की जान से खेलता हैमैं पूछता हूँ–‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’मेरे देश की संसद मौन है। धूमिल की कविता रोटी और संसद से प्रेरित

सवाल करते रहो

कुछ साल पहलेशायद इमर्जेंसी के समयमेरे पापा कुछ १५ साल के रहे होंगेतब उनके एक दोस्त ने उन्हें एक कविता पढ़ने को दीओम प्रकाश वाल्मीकि कीमगर जैसे ही दादा ने देखा उन्होंने वह फट से छीन लीऔर कूड़े में फेंक दीऔर कहा यह सब मत पढ़ा करचल रामायण पढ़उसमें भी तो राम शबरी के झूठेContinue reading “सवाल करते रहो”

Fish Strolling In a Garden

Suffocating when everything around me is so beautiful Sometimes I feel like a fish strolling in a garden Beautiful, is it? No seriously a garden is beautiful But it is not where the fish belongs Does it? It is looking for small puddles to survive Small puddles which are hindrances to others And a chanceContinue reading “Fish Strolling In a Garden”

Waqt- Ek Makeup Artist

Kitni khoobsurti se waqt chehre ka makeup karta hai Bachpan ke kit main se choti-choti aankhein nikalta hai Aur unhe bade saleeke se fit karta hai Gaal main hansi ke gubaare bhar deta hai Aur aankhon main zidd ke aansu Kitni khoobsurti se waqt chehre ka makeup karta hai Jawaani ke brush se maarta haiContinue reading “Waqt- Ek Makeup Artist”

ज़िंदगी दोगली होती है।

ज़िंदगी बहुत दोगली होती है, अकेलेपन में घबराती है, महफ़िल में इतराती है, तो कभी महफ़िल मैं डर जाती है, और अकेलेपन में सुकून पाती है, ज़िंदगी बहुत दोगली होती है। ज़िंदगी बहुत दोगली होती है, कभी किसी का साथ चाहती है, तो कभी एक पल में ही उसी को खुद से फरार चाहती है,Continue reading “ज़िंदगी दोगली होती है।”

Mumbai Ke Log, Mumbai ka Mausam

Mumbai ke log, Mumbai ka mausam Dono ek se hi lagte hain Ek din main na jaane kitni baar karwatain badalte hain. Par mujhe yeh samajh nahi aata Ki mausam ke kaaran log aise hai, Ya logon ke kaaran mausam aisa hai. Ki logon ka gussa itni garmi paida karta hai, Ya iss dhoop keContinue reading “Mumbai Ke Log, Mumbai ka Mausam”

I was Alarm Clock Zoned

I woke her up every morning Leaving a “Seize the Day”  message She didn’t reply. Both at lunch and dinner I reminded  her to eat properly Leaving a “Eat Healthy”  message But she didn’t reply. After a long day, I texted her a joke Which I supposed made her laugh. And she finally reply, YouContinue reading “I was Alarm Clock Zoned”