रोटी, कपड़ा और मकान

सड़क पर निकले तोदवाई छिड़क दी,रेल की खिड़की मेंनंगे बदन से भी पैसा मांग लियाट्रेन शुरू हुई तो बिल्डर्स के साथ मीटिंग करकेमजदूरों को कैद कर लिया गयाउनके जाने पर रोक लगा दीक्या ताकतवर अपनी बची कुची शर्मडोलोगाना कॉफी में मिला कर पी गएउनका क्या कसूर हैयही की वह हमारे घर बनाते हैंहमारे लिए अनाजContinue reading “रोटी, कपड़ा और मकान”