देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता

यदि तुम्हारे घर केएक कमरे में आग लगी होतो क्या तुमदूसरे कमरे में सो सकते हो?यदि तुम्हारे घर के एक कमरे मेंलाशें सड़ रहीं होंतो क्या तुमदूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?यदि हाँतो मुझे तुम सेकुछ नहीं कहना है। देश कागज पर बनानक्शा नहीं होताकि एक हिस्से के फट जाने परबाकी हिस्से उसी तरहContinue reading “देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता”

बुली भैया

बुली भैया9th में होंगेजब हम 4th में थेऑटो में उनका एक छत्र राज थाकोने वाली सीट पर बस उनका ही अधिकार थावह कूटनीती के ज्ञाता थेअंडरटेकर वाली कूटनीती केजब मौका मिलता हमें कूट देते थेऑटो में उनको बैग टच हुआ तोकूट दियाउनके जोक पर हम हंसे नहीं तबकूट दियाउनके लिए दो वाली पेप्सी नहीं लाएContinue reading “बुली भैया”

जान और संसद

एक आदमीजान से मर रहा हैएक आदमी जान बचा रहा हैएक तीसरा आदमी भी हैजो ना जान बचाता है, ना कोशिश करता हैवह सिर्फ़ दूसरों की जान से खेलता हैमैं पूछता हूँ–‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’मेरे देश की संसद मौन है। धूमिल की कविता रोटी और संसद से प्रेरित

टफी जी और लॉकडाउन

नेताजी की पत्नी जब ब्याह कर आयी तो अपने संस्कारों का प्रमाण पत्र, टफी जी के रूप में लेकर आई । एक बहुचर्चित फिल्म के कारण दुनिया के सारे ‘टफी’ सबसे संस्कारी कुत्ते कहलाने लगे थे। उस फिल्म के हीरो को भी जानवरों से खूब प्यार था। खैर वो तो किसी और दिन की बातContinue reading “टफी जी और लॉकडाउन”

मध्य प्रदेश और कोरोना

कहानी शुरू होती है दिल्ली सेजब नेताजी ने विधायकों की बोली लगाईऔर टीवी पर बोले, ‘कोरोना वोरोना कुछ नहीं होता’सियासी मूजिकल चेयर मेंजनता का तानपुरा बजना शुरू हुआदूसरी तान दी,वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले लोगों ने जिन्होंने २०२० में ना जाने कौनसा वर्ल्ड कप जीतातीसरी तान दी मौलवी नेजिसने धर्म की ऐसी गलत पट्टीContinue reading “मध्य प्रदेश और कोरोना”

ज़िंदगी दोगली होती है।

ज़िंदगी बहुत दोगली होती है, अकेलेपन में घबराती है, महफ़िल में इतराती है, तो कभी महफ़िल मैं डर जाती है, और अकेलेपन में सुकून पाती है, ज़िंदगी बहुत दोगली होती है। ज़िंदगी बहुत दोगली होती है, कभी किसी का साथ चाहती है, तो कभी एक पल में ही उसी को खुद से फरार चाहती है,Continue reading “ज़िंदगी दोगली होती है।”

Mumbai Ke Log, Mumbai ka Mausam

Mumbai ke log, Mumbai ka mausam Dono ek se hi lagte hain Ek din main na jaane kitni baar karwatain badalte hain. Par mujhe yeh samajh nahi aata Ki mausam ke kaaran log aise hai, Ya logon ke kaaran mausam aisa hai. Ki logon ka gussa itni garmi paida karta hai, Ya iss dhoop keContinue reading “Mumbai Ke Log, Mumbai ka Mausam”

Dil Toh Secular Hai

Yeh jo dil hai woh bada hi secular bana phirta hai Isse “love jihad” ka concept samajh nahi aata Iss bewakoof ko kya pata, Kitni himmat lagti hai unke pass jaane main Par yeh toh unko dekhte hi unke peeche bhaagta hai Usse mazhab se koi farq nahi padta hai Woh toh bas andar aurContinue reading “Dil Toh Secular Hai”