भगवान और दादा

जब रात अच्छी होती है,तो दादाजी भगवान के कमरे में सोते हैंजब रात बुरी होती हैतो भगवान जी दादा के कमरे में सोते हैंमैं दोनों के बीच में सोता हूंकभी भगवान की तरफ़ वाली खिड़कीप्रकृति के सुहावने गीत गुनगुनाती हैकभी दादा की तरफ़ वाली खिड़कीबुढ़ापे की गाथा कराहती है।

स्थिरता और बदलाव

मेरे दादा को बदलाव पसंद नहींउन्होंने शायाद इतने उतार चढ़ाव देखें हैंकी वो हर चीज़ में एक स्थिरता खोजते हैंमेरी मां को स्थिरता से ऊब जाती हैंउन्होंने अपने शुरू के जीवन में ऐसा अभाव देखा हैजिसे बदलाव से ही पूरा किया जा सकता थाइस रोज़मर्रा के द्वंद्व के बीच एक आदमी खड़ा हैजिन्हें मैं पापाContinue reading “स्थिरता और बदलाव”