ज़िम्मेदारी

कभी कभी किसी भी कारण वश हम गलत ज़िम्मेदारी उठाने लगते हैं,जैसे हम ना जाने कितनी बारमौत को अपने पास लाने की ज़िम्मेदारीखुद लेने लगते हैंऔर जो हमारी असली ज़िम्मेदारी हैज़िन्दगी जीते रहने कीउससे भटक जाते हैंमौत तो हमारे पास चलकर आ जायेगीथोड़ा ज़िंदगी के पास भी जाकर देखेंअच्छा लगेगा।

नशे में धूत

जब हम लाखों टन अनाज को सड़ते देख कुछ नहीं कहते,जब उस लाखों टन सड़े अनाज को शराब में घुलते देख कुछ नहीं कहते,तो हम सब बिना पिये नशे में धूत हैंऔर नशे में धूत लोगों को अपनी लाचारी नहीं दिखतीदूसरों की लाचारी की बात तो छोड़ ही दीजिए…