If God Is An Artist

If God is an artist,Did he ever procrastinate?Did he have a deadline to create certain species?Did he just put out first drafts of certain species?Did he use stream of consciousness technique while creating some species?Did he loose interest in the middle while creating certain species?Did he take loo breaks in between?Was he at his bestContinue reading “If God Is An Artist”

देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता

यदि तुम्हारे घर केएक कमरे में आग लगी होतो क्या तुमदूसरे कमरे में सो सकते हो?यदि तुम्हारे घर के एक कमरे मेंलाशें सड़ रहीं होंतो क्या तुमदूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?यदि हाँतो मुझे तुम सेकुछ नहीं कहना है। देश कागज पर बनानक्शा नहीं होताकि एक हिस्से के फट जाने परबाकी हिस्से उसी तरहContinue reading “देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता”

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड ४

आशा है आपकी नाक में ऑक्सीजन और कानों में प्रोपोगंडा बराबार पहुंच रहा होगा। आपकी भक्ति में शायद थोड़ी कमी रह गई इसलिए माल्डिव्स की जगह गोवा तक ही जा पाए छुट्टी मनाने। खैर आपने जो वहां से पॉजिटिव फॉरवर्ड्स भेजे थे, उससे आपके कॉविड पॉजिटिव दोस्त को कोई असर नहीं हुआ, वो भी अंतिमContinue reading “आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड ४”

जब भी तेरी याद आती है

एक आस पास में आती हैऔर कान में चुपके से कह जाती है,क्या अब भी बचा है प्यार…अभी बता दोअभी बता दो,क्योंकिइस बारउम्मीद का बल्बदिल को रोशन करने मेंथोड़ा ज़्यादा समय लेगा।

ज़िम्मेदारी

कभी कभी किसी भी कारण वश हम गलत ज़िम्मेदारी उठाने लगते हैं,जैसे हम ना जाने कितनी बारमौत को अपने पास लाने की ज़िम्मेदारीखुद लेने लगते हैंऔर जो हमारी असली ज़िम्मेदारी हैज़िन्दगी जीते रहने कीउससे भटक जाते हैंमौत तो हमारे पास चलकर आ जायेगीथोड़ा ज़िंदगी के पास भी जाकर देखेंअच्छा लगेगा।

फैमिली फोटो

रिश्तों को टिका कर रखने के लिएदिल की दीवार सेईगो की सीलन को हटाना पड़ता हैऔर कॉम्प्रोमाइज की कील ठोककरफैमिली फोटो लगाना पड़ता है।

Aadarniya Whatsapp Uncle Episode -3

Aaj aapne phirse ek misogynist joke group main forward kiya, jiske reply main ek do uncle ke alawa koi nahi hansa. Aapke inn forwards se group ke non bigots utne hi uncomfortable hote hain jitne pradhan sevak ji press conference ka naam sunke. Khair agar mansplaining Olympic sport hota toh India ko gold jeetne seContinue reading “Aadarniya Whatsapp Uncle Episode -3”

14 Hours & 14 Years

It was 14 years since she was laying stillNot moving an inchEverybody lost hopeFirst it was friendsThen relativesThen their kidsEverybody left one after anotherOnly he waitedWaited for a sign by herHe can hear her heartbeat for 14 yearsAnd that’s what kept him goingAnd yeah there was one more thingThat poemHe narrated everydayThat poemShe narratedWhen theyContinue reading “14 Hours & 14 Years”

तुम्हारा गुस्सा तुम्हें कहां ले जाता है?

क्या तुम्हारा गुस्सा किसी के टाइमलाइन पर जाकर गाली देने के बाद तुम्हें छोड़ देता है?या वो सचमुच मदद करता है गलत के खिलाफ आवाज उठाने को । क्या वो तुम्हें खुदको शिकार और सामने वाले को शिकारी बोलने के लिए भड़काता है?या वो दोनों को इंसान की तरह देखने में मदद करता है। क्याContinue reading “तुम्हारा गुस्सा तुम्हें कहां ले जाता है?”

7-Year Old Psychologist

This poem demands you to breathe.Breathe deeply.The air you just took inMay not be the best you ever took inBut it relaxes youIt is less annoying thanThe air you get in a Lay’s packet.Ohh now you are smilingIf notSmile now.Smile as if you got two candies in one wrapper.Ohh so you know how to breathContinue reading “7-Year Old Psychologist”

मैं हूं थाली

मैं हूं थाली,पिछले कुछ महीनों में,सबसे गरीब लोगों के घर मेंमैं ज़्यादा ही खाली होती गईऔर सबसे अमीर लोगों के घर मेंज़रूरत से ज़्यादा भरती गईमिडल क्लास मुझेबजाते रहेऔर नेता उनकी थाली में डोनेशनके नाम पर छेद करकेअपने लिए नए महलबनाते गएमैं हूं थाली।

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड २

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल,आशा है आप सकुशल होंगे और भक्ति में लीन होंगेसुना है आप कोविड वैक्सीन लगवाने ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे हैं, बढ़िया है, मगर मेरा मानना है एक बार आयुर्वेद के डॉक्टर की सलाह लेकर देखें, शायद सरकार ने उन्हें कुछ सोच समझ कर ही सर्जरी की परमिशन दी होगी। मैं तोContinue reading “आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड २”

कैमरे में बन्द अपाहिज – रघुवीर सहाय

हम दूरदर्शन पर बोलेंगेहम समर्थ शक्तिवानहम एक दुर्बल को लाएंगेएक बंद कमरे मेंउससे पूछेंगे तो आप क्या आपाहिज हैं ?तो आप क्यों अपाहिज हैं ?आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगादेता है ?(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)हां तो बताइए आपका दुख क्या हैजल्दी बताइए वह दुख बताइएबता नहीं पाएगासोचिएबताइएआपको अपाहिज होकर कैसा लगता हैकैसायानी कैसा लगता है(हम खुद इशारेContinue reading “कैमरे में बन्द अपाहिज – रघुवीर सहाय”

बीच की दुनिया

हम दोनों के बीच एक दुनिया है,यह दुनिया ऐसी ही चलती रहेगुस्सा ना हो जाएइसलिए हमने दूर होने का सोचापर जैसे ही पहले से दूर हुए तोइस दुनिया ने हमारा दर्द भी समेट लियाशायद पास आते तो ज़्यादा प्यार समेट लेतीजो दुनिया के गुस्से से लड़ने में मदद करता।

Letter To My Anxiety

Dear Anxiety,I have been meaning to write this for so long, we have been 3a.m. friends for a long time now. I remember those nights, when you entered my head before school examinations,  college presentations, job interviews and I stayed up all night thinking every worst case scenario that could unfold the next day ratherContinue reading “Letter To My Anxiety”

दुष्चक्र

आंखें बोली आंसू से तुम क्यों थम गए भाईउम्र बड़ी तो क्या हुआ अब भी जारी है दिलो दिमाग की लड़ाई… आंसू बोला दिल से पूछो उसने कितनी बातें छुपाईदिल ने दिमाग को दोषी ठहराया, कहा उसने दी थीसमझदारी की दुहाई ।

बुली भैया

बुली भैया9th में होंगेजब हम 4th में थेऑटो में उनका एक छत्र राज थाकोने वाली सीट पर बस उनका ही अधिकार थावह कूटनीती के ज्ञाता थेअंडरटेकर वाली कूटनीती केजब मौका मिलता हमें कूट देते थेऑटो में उनको बैग टच हुआ तोकूट दियाउनके जोक पर हम हंसे नहीं तबकूट दियाउनके लिए दो वाली पेप्सी नहीं लाएContinue reading “बुली भैया”

Aadarniya Whatsapp Uncle

Aadarniya Whatsapp Uncle,Asha hain aap sakushal honge,Sabse pehle toh Whatsapp ki taraf se Bharat ke rashtragaan ko sarvashreshta rashtragaan milne ki shubhkaamnaayeinAap aise hi agar Harr Harr Chokidaar ki maala japte rahenge aur Congress ko niyamit roop se din main 4 baar gaali dete rahenge  (Jabki jab wo asal main gadbad jhala kar rahi thi,Continue reading “Aadarniya Whatsapp Uncle”

बॉम्ब स्क्वाड का कुत्ता

एक बार बॉम्ब स्क्वाड के कुत्ते से मैंने पूछातुम्हें बारूद ढूंढते हुएइब्राहीम के इत्र की खुशबू अायीया शिव के धतूरे कीवह गुराया…मैं पीछे हटाउसने गुस्से में जवाब दियामुझे तो बसउन दोनों के बीचनफ़रत फैलाने वालेकी बदबू अायी।

सपनों के बीज

हम सब अपने सपनों को बोते हैंपर सबकी ज़मीन एक सी नहीं होतीसबको एक सी धूप नहीं मिलतीकांटे सबके हिस्से आते हैंपर सबको माली की मदद नहीं मिलती अकेले रहकर भी जो ठान ले तोकांटों में भी गुलाब उगादेसाथ मिलने पर भी जो भटके तोसूरजमुखी की भी चमक लुटा दे लहलहाकर खुदकभी जो सहरा देContinue reading “सपनों के बीज”

नशे में धूत

जब हम लाखों टन अनाज को सड़ते देख कुछ नहीं कहते,जब उस लाखों टन सड़े अनाज को शराब में घुलते देख कुछ नहीं कहते,तो हम सब बिना पिये नशे में धूत हैंऔर नशे में धूत लोगों को अपनी लाचारी नहीं दिखतीदूसरों की लाचारी की बात तो छोड़ ही दीजिए…

सच

सचसच के मायने बदल गए हैंहम बस दो सच ही समझते हैंपहले ही माना हुआ सचदूसरों को झूठलाता सचहमने अपने मन के एक तरफ कालीऔर एक तरफ सफेद स्याही पोत ली हैफिल्म में, टीवी में, इंटरनेट परसब जगह हमअपने माने हुए सच कोऔर सच बनाने केतरीक़े खोज रहे हैंताकि दूसरों की नज़रों मेंजब खुद कोContinue reading “सच”

जुमला और हमला

चुनावी मौसम में नेताजी ने लगाया“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”का नाराबेटी पढ़ीआगे बढ़ीउनकी गलतियों के ख़िलाफबेटी की आवाज़ उठीतो जवाब मेंनेताजी बोलेबेटी वो नारा नहीं थाथा एक जुमला…हमसे सवाल करोगीतो हो जाएगातुम्हारी आज़ादी पर हमला On Friday, Natasha Narwal joined the list of students of falsely accused with UAPA for protesting against CAA & NRC andContinue reading “जुमला और हमला”

चिड़िया और पेड़

एक बार मैंने अपनी बालकनी से एक पेड़ और चिड़िया की बात सुनी, उसी के कुछ अंश। पेड़: बात मान…मैं बोल रहा हूं ना,उड़ जा चिड़िया: आप ही बताओ कैसे जाऊं, अभी तो बच्चों को ढंग से उड़ना तक नहीं आया है पेड़: तू बात को समझ नहीं रही है, वो तो लाकडाउन की वजहContinue reading “चिड़िया और पेड़”

यह कैसा समय है? (हिन्दी अनुवाद)

Original – What Kind Of Times Are These? By Adrienne Rich नोट: यह शब्दशः अनुवाद नहीं है, रूह को पकड़ने की कोशिश है । यहां से कुछ दूर पर एक जगह है, जहां दो रास्ते मिलते हैं,एक रास्ते पर दो काफ़ी लंबे पेड़ों के बीच हरी घांस अब भी उग रही हैऔर दूसरे रास्ते परContinue reading “यह कैसा समय है? (हिन्दी अनुवाद)”

स्थिरता और बदलाव

मेरे दादा को बदलाव पसंद नहींउन्होंने शायाद इतने उतार चढ़ाव देखें हैंकी वो हर चीज़ में एक स्थिरता खोजते हैंमेरी मां को स्थिरता से ऊब जाती हैंउन्होंने अपने शुरू के जीवन में ऐसा अभाव देखा हैजिसे बदलाव से ही पूरा किया जा सकता थाइस रोज़मर्रा के द्वंद्व के बीच एक आदमी खड़ा हैजिन्हें मैं पापाContinue reading “स्थिरता और बदलाव”

रोटी, कपड़ा और मकान

सड़क पर निकले तोदवाई छिड़क दी,रेल की खिड़की मेंनंगे बदन से भी पैसा मांग लियाट्रेन शुरू हुई तो बिल्डर्स के साथ मीटिंग करकेमजदूरों को कैद कर लिया गयाउनके जाने पर रोक लगा दीक्या ताकतवर अपनी बची कुची शर्मडोलोगाना कॉफी में मिला कर पी गएउनका क्या कसूर हैयही की वह हमारे घर बनाते हैंहमारे लिए अनाजContinue reading “रोटी, कपड़ा और मकान”

सपनों का किनारा

सपनों के किनारे पे बैठे थे तीन यारएक के लिए बाप दादा का बड़ा जहाज आयाऔर वो विदेश निकल लियादूसरे के लिए एक नाव अाईजिसे उसके मां और पिता नेबड़ी मेहनत से बनाया थादूसरा उसमें बैठा और बड़े शहरनिकल लियातीसरे ने इंतजार कियासोचा कोई तो आएगाकोई आया तो सहीपर उसे धक्का देकर चला गयाथोड़ी देरContinue reading “सपनों का किनारा”

Untied Laces

I close my eyesTo find words for this poemAnd I see a 10-year old kidOf ‘5th E’ eating his tiffinAlone in the classSitting in the library alone,Limping in the corridorsWhen the other kids ranAfter the last school bellI don’t know why is he aloneMaybe that’s how he feltAll his school lifeWhen only the special shoesHeContinue reading “Untied Laces”

God’s Home

Do you really think God lives in a building with four walls? Buildings with 20-feet walls which have inscription of His own stories Do you really think He is so self-obsessed? Buildings that have pillars craved with women bowing down at the entrance Do you really think He is a misogynist? Buildings that doesn’t letContinue reading “God’s Home”

जान और संसद

एक आदमीजान से मर रहा हैएक आदमी जान बचा रहा हैएक तीसरा आदमी भी हैजो ना जान बचाता है, ना कोशिश करता हैवह सिर्फ़ दूसरों की जान से खेलता हैमैं पूछता हूँ–‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’मेरे देश की संसद मौन है। धूमिल की कविता रोटी और संसद से प्रेरित

टफी जी और लॉकडाउन

नेताजी की पत्नी जब ब्याह कर आयी तो अपने संस्कारों का प्रमाण पत्र, टफी जी के रूप में लेकर आई । एक बहुचर्चित फिल्म के कारण दुनिया के सारे ‘टफी’ सबसे संस्कारी कुत्ते कहलाने लगे थे। उस फिल्म के हीरो को भी जानवरों से खूब प्यार था। खैर वो तो किसी और दिन की बातContinue reading “टफी जी और लॉकडाउन”

मध्य प्रदेश और कोरोना

कहानी शुरू होती है दिल्ली सेजब नेताजी ने विधायकों की बोली लगाईऔर टीवी पर बोले, ‘कोरोना वोरोना कुछ नहीं होता’सियासी मूजिकल चेयर मेंजनता का तानपुरा बजना शुरू हुआदूसरी तान दी,वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले लोगों ने जिन्होंने २०२० में ना जाने कौनसा वर्ल्ड कप जीतातीसरी तान दी मौलवी नेजिसने धर्म की ऐसी गलत पट्टीContinue reading “मध्य प्रदेश और कोरोना”

Heart Inc.

When we are in loveWith oneself or someone elseThere are some workers in our heartWho process everything we feelInto a thing of beautyBut when our heart is brokenDoes these workers go on a lockdownDoes the creation of beauty comes to a haltNot really,It just slows downAs the workers now divideOne half keep creating beautyStimulated byMemesContinue reading “Heart Inc.”

राम रामलाल

वह चला था चौदह बरस तकअब उसे तुम चार दिवारी में बंद करउसके नाम पे लड़ कर धंधा खोलना चाहते होऔर उसे धर्म बताते होजब कर रहे हो उसका १००८ बार गुणगान टीवी के सामनेकोई रामलाल पैदल ही जा रहा है १००८ किलोमीटर अपने परिवार के पासतुम पूछते हो मैं तो घर में बैठकर क्याContinue reading “राम रामलाल”

सवाल करते रहो

कुछ साल पहलेशायद इमर्जेंसी के समयमेरे पापा कुछ १५ साल के रहे होंगेतब उनके एक दोस्त ने उन्हें एक कविता पढ़ने को दीओम प्रकाश वाल्मीकि कीमगर जैसे ही दादा ने देखा उन्होंने वह फट से छीन लीऔर कूड़े में फेंक दीऔर कहा यह सब मत पढ़ा करचल रामायण पढ़उसमें भी तो राम शबरी के झूठेContinue reading “सवाल करते रहो”