7-Year Old Psychologist

This poem demands you to breathe.Breathe deeply.The air you just took inMay not be the best you ever took inBut it relaxes youIt is less annoying thanThe air you get in a Lay’s packet.Ohh now you are smilingIf notSmile now.Smile as if you got two candies in one wrapper.Ohh so you know how to breathContinue reading “7-Year Old Psychologist”

मैं हूं थाली

मैं हूं थाली,पिछले कुछ महीनों में,सबसे गरीब लोगों के घर मेंमैं ज़्यादा ही खाली होती गईऔर सबसे अमीर लोगों के घर मेंज़रूरत से ज़्यादा भरती गईमिडल क्लास मुझेबजाते रहेऔर नेता उनकी थाली में डोनेशनके नाम पर छेद करकेअपने लिए नए महलबनाते गएमैं हूं थाली।

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड २

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल,आशा है आप सकुशल होंगे और भक्ति में लीन होंगेसुना है आप कोविड वैक्सीन लगवाने ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे हैं, बढ़िया है, मगर मेरा मानना है एक बार आयुर्वेद के डॉक्टर की सलाह लेकर देखें, शायद सरकार ने उन्हें कुछ सोच समझ कर ही सर्जरी की परमिशन दी होगी। मैं तोContinue reading “आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड २”

कैमरे में बन्द अपाहिज – रघुवीर सहाय

हम दूरदर्शन पर बोलेंगेहम समर्थ शक्तिवानहम एक दुर्बल को लाएंगेएक बंद कमरे मेंउससे पूछेंगे तो आप क्या आपाहिज हैं ?तो आप क्यों अपाहिज हैं ?आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगादेता है ?(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)हां तो बताइए आपका दुख क्या हैजल्दी बताइए वह दुख बताइएबता नहीं पाएगासोचिएबताइएआपको अपाहिज होकर कैसा लगता हैकैसायानी कैसा लगता है(हम खुद इशारेContinue reading “कैमरे में बन्द अपाहिज – रघुवीर सहाय”