Humanity and Films

I don’t really like writing about films, but now I realised that I wasn’t watching the right films. But are there any right or wrong films though? Yes, there are, the films that becomes an experience is a right film. Period. The film that connects to you and lets you get in touch with yourContinue reading “Humanity and Films”

कोई खतरा नहीं- ओमप्रकाश वाल्मीकि

शहर की सड़कों पर दौड़ती-भागती गाड़ियों के शोर में सुनाई नहीं पड़ती सिसकियाँ बोझ से दबे आदमी की जो हर बार फँस जाता है मुखौटों के भ्रमजाल में जानते हुए भी कि उसकी पदचाप रह जाएगी अनचीन्ही नहीं आएगा उसके हिस्से समन्दर की रेत में पड़ा सीपी का मोती लहरें नहीं धोएँगी पाँव हवाएँ भीContinue reading “कोई खतरा नहीं- ओमप्रकाश वाल्मीकि”

ओ नारी—समता की सहपाठी हो तुम!

ओ नारी—समता की सहपाठी हो तुम!अनेक महान सम्बोधन दिये तुम्हें पर दिया नहींतुम्हें निर्णय का अधिकारतुम्हें रिश्ते-नातों श्रृंखला से जकड़ा—शस्त्र और शास्त्र का भय दिखलाकर जो पाँव तुम्हारे साथ चलने की खाते हैं क़समवे ही तुम्हें ठुकरातेजो हाथ तुम्हारा हाथ थामतेवे ही गला दबातेफिर भी ओ नारीअनन्त विसंगतियों-विकृतियों के बीचपत्थर पर उगती—दूब-सी उगती रही हो तुम!Continue reading “ओ नारी—समता की सहपाठी हो तुम!”