हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं; जुम्मन का घर फिर क्यों जले ऐसे नाजुक वक्त में हालात को मत छेड़िये हैं कहाँContinue reading “हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये”

The Eternal Conflict

मूर्ति के चार टुकड़ों से निकलकर पूरी दुनिया पे छाओ, भगवान हो यार थोड़ा वैसा बनके दिखाओ… तू अगर चाहे तो मूर्ति में भी दिख जायेगा वो, तेरे अंदर भी वो है, तेरे बाहर भी वो…