बुखार

अब तो बुखार भी रूठ कर चले जाता है, कहता है भाई अब कोई मज़ा नहीं आता है, तुम्हारे शरीर में अपना घर बनाने से, तुम तो अकेले रहने लगे हो, ना माँ है गर्म पानी की पट्टी लिए, और ना नानी माँ बुरी नज़र उतारने के लिए। ना पापा को जल्दी है दफ्तर सेContinue reading “बुखार”