जब भी तेरी याद आती है

एक आस पास में आती है
और कान में चुपके से कह जाती है,
क्या अब भी बचा है प्यार…
अभी बता दो
अभी बता दो,
क्योंकि
इस बार
उम्मीद का बल्ब
दिल को रोशन करने में
थोड़ा ज़्यादा समय लेगा।

ज़िम्मेदारी

कभी कभी किसी भी कारण वश
हम गलत ज़िम्मेदारी उठाने लगते हैं,
जैसे हम ना जाने कितनी बार
मौत को अपने पास लाने की ज़िम्मेदारी
खुद लेने लगते हैं
और जो हमारी असली ज़िम्मेदारी है
ज़िन्दगी जीते रहने की
उससे भटक जाते हैं
मौत तो हमारे पास चलकर आ जायेगी
थोड़ा ज़िंदगी के पास भी जाकर देखें
अच्छा लगेगा।

फैमिली फोटो

रिश्तों को टिका कर रखने के लिए
दिल की दीवार से
ईगो की सीलन को हटाना पड़ता है
और कॉम्प्रोमाइज की कील ठोककर
फैमिली फोटो लगाना पड़ता है।

Aadarniya Whatsapp Uncle Episode -3

Aaj aapne phirse ek misogynist joke group main forward kiya, jiske reply main ek do uncle ke alawa koi nahi hansa. Aapke inn forwards se group ke non bigots utne hi uncomfortable hote hain jitne pradhan sevak ji press conference ka naam sunke. Khair agar mansplaining Olympic sport hota toh India ko gold jeetne se koi nahi rok pata.  Kabhi kabhi mujhe lagta hai ki humari Mummy ko bas kisike sangeet main mic aasani se pass hua hai, dusri sab jagah khud ke dum par ladd kar chheena pada hai. Aur wo aapka ego handle nahi kar pata hai. Isliye aap apni bhasad group main nikaalte hain. Waise ek aur baat aap apne status pe jo ladkiyon ko sanskar waali fashion advice dete hain, usse pehle apne ladke ko IRL main beedi peeke nukkad pe wait karne se mana karein. Kyunki aapki wife ke vericose veins ki seema ho na ho hypocrisy ki seema hoti hai.
Namaskar.

14 Hours & 14 Years

It was 14 years since she was laying still
Not moving an inch
Everybody lost hope
First it was friends
Then relatives
Then their kids
Everybody left one after another
Only he waited
Waited for a sign by her
He can hear her heartbeat for 14 years
And that’s what kept him going
And yeah there was one more thing
That poem
He narrated everyday
That poem
She narrated
When they were both in 6th grade
He used to get bullied
He used to get beaten up
So hard
That one day he ended up in a hospital
Laying still as she was now
But she sat by her side narrating a poem
For 14 hours
Before he opened his eyes
And now he was just returning the favour
For the last 14 years
Until one afternoon
It was the 14th hour of the day
He made two glasses of ginger lemon tea
And started narrating the same poem to her
But for the first time
For the first time in 14 years
He forgot the last and the fourteenth line
Because he saw her fingers moving
Trying to reach for her glass
Which was half filled with ginger lemon
And half with the sunlight.

तुम्हारा गुस्सा तुम्हें कहां ले जाता है?

क्या तुम्हारा गुस्सा किसी के टाइमलाइन पर जाकर गाली देने के बाद तुम्हें छोड़ देता है?
या वो सचमुच मदद करता है गलत के खिलाफ आवाज उठाने को ।

क्या वो तुम्हें खुदको शिकार और सामने वाले को शिकारी बोलने के लिए भड़काता है?
या वो दोनों को इंसान की तरह देखने में मदद करता है।

क्या वो ऊंची दीवारें खड़ी कर देता है,
या लंबे और सशक्त पुल बनाता है।

क्या तुम्हारा गुस्सा बार बार तुम्हें अंधेरी रात में दर्द भरा अतीत याद दिलाता है,
या तुम्हें हर सुबह कल से ज़्यादा रोशन करने के लिए प्रेरित करता है।

क्या यह गुस्सा एक ही पल में खुद को खत्म करने के लिए उकसाता है,
या वो सालों तक लोगों को रास्ता दिखाने की ताक़त रखता है।

7-Year Old Psychologist

This poem demands you to breathe.
Breathe deeply.
The air you just took in
May not be the best you ever took in
But it relaxes you
It is less annoying than
The air you get in a Lay’s packet.
Ohh now you are smiling
If not
Smile now.
Smile as if you got two candies in one wrapper.
Ohh so you know how to breath deeply and smile.
Then you should do it more often.
That’s all.
Who would have thought taking in air and widening your mouth is the first step of happiness
Thanks for being in a session with a 7-year old psychologist.

मैं हूं थाली

मैं हूं थाली,
पिछले कुछ महीनों में,
सबसे गरीब लोगों के घर में
मैं ज़्यादा ही खाली होती गई
और सबसे अमीर लोगों के घर में
ज़रूरत से ज़्यादा भरती गई
मिडल क्लास मुझे
बजाते रहे
और नेता उनकी थाली में डोनेशन
के नाम पर छेद करके
अपने लिए नए महल
बनाते गए
मैं हूं थाली।

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल – एपिसोड २

आदरणीय व्हाट्सएप अंकल,
आशा है आप सकुशल होंगे और भक्ति में लीन होंगे
सुना है आप कोविड वैक्सीन लगवाने ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे हैं, बढ़िया है, मगर मेरा मानना है एक बार आयुर्वेद के डॉक्टर की सलाह लेकर देखें, शायद सरकार ने उन्हें कुछ सोच समझ कर ही सर्जरी की परमिशन दी होगी। मैं तो कहता हूं कि लगे हाथों पाइल्स का ऑपरेशन भी आयुर्वेद के डॉक्टर करा लीजिए, शायद किसानों को पिज़्ज़ा खाते देख आपको जो खुजली हुई होगी उससे थोड़ा आराम मिलेगा।
आशा करता हूं आप निमयित रूप से लाला रामदेव के साथ सूर्यनमस्कार कर रहे होंगे और प्रधान सेवक जी को देखकर मशरूम खाने लग गए होंगे क्योंकि किसान जो भी उगाते हैं, उसका तो बॉयकॉट जोर शोर से चल रहा होगा।
अरे हां, आपने जो वो उस दिन किसानों को खालिस्तानी बताते हुए वीडियो डाली थी, उन किसानों के बेटे दरसअल फौज में हैं ऐसा मालूम हुआ है। खैर छोड़िए यह सब सच्ची खबरों को कौन देखता है आजकल, आप तो यह बताइए हमारे देशभक्त बड़े भैया की अब्रॉड में सेटल होने की तैयारी कैसी चल रही है। उनको थोड़ा सुधीर भाई और गोस्वामी जी की विडियोज दिखाते रहना ताकि वो वहां जाकर पाकिस्तानियों को झट से पहचान लें, नहीं तो इंटरनेशनल लव जिहाद का केस हो जाएगा क्योंकि दूसरे देश में सब भारतीय ही लगते हैं । चलिए आज की बातें यहीं तक, सबके लिए फ्री में मैचमेकिंग करने वाली अंटी को प्रणाम और आईफोन पर Fau-G खेलने वाले छोटू को प्यार।

कैमरे में बन्द अपाहिज – रघुवीर सहाय

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे
हम समर्थ शक्तिवान
हम एक दुर्बल को लाएंगे
एक बंद कमरे में
उससे पूछेंगे तो आप क्या आपाहिज हैं ?
तो आप क्यों अपाहिज हैं ?
आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा
देता है ?
(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा)
हां तो बताइए आपका दुख क्या है
जल्दी बताइए वह दुख बताइए
बता नहीं पाएगा
सोचिए
बताइए
आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है
कैसा
यानी कैसा लगता है
(हम खुद इशारे से बताएंगे कि क्या ऐसा ?)
सोचिए
बताइए
थोड़ी कोशिश करिए
(यह अवसर खो देंगे ?)
आप जानते हैं कि कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते
हम पूछ-पूछ उसको रुला देंगे
इंतजार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का
करते हैं ?
फिर हम परदे पर दिखलाएंगे
फूली हुई आंख की एक बड़ी तसवीर
बहुत बड़ी तसवीर
और उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी
(आशा है आप उसे उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे)
एक और कोशिश
दर्शक
धीरज रखिए
देखिए
हमें दोनों एक संग रुलाने हैं
आप और वह दोनों
(कैमरा
बस करो
नहीं हुआ
रहने दो
परदे पर वक्त की कीमत है)
अब मुसकुराएंगे हम
आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम
(बस थोड़ी ही कसर रह गई)
धन्यवाद ।

बीच की दुनिया

हम दोनों के बीच एक दुनिया है,
यह दुनिया ऐसी ही चलती रहे
गुस्सा ना हो जाए
इसलिए हमने दूर होने का सोचा
पर जैसे ही पहले से दूर हुए तो
इस दुनिया ने हमारा दर्द भी समेट लिया
शायद पास आते तो ज़्यादा प्यार समेट लेती
जो दुनिया के गुस्से से लड़ने में मदद करता।

Letter To My Anxiety

Dear Anxiety,
I have been meaning to write this for so long, we have been 3a.m. friends for a long time now. I remember those nights, when you entered my head before school examinations,  college presentations, job interviews and I stayed up all night thinking every worst case scenario that could unfold the next day rather than working on myself. We were inseparable. Do you remember the first opportunity I got to speak on stage, but I could not muster up the courage to speak a word because you were silently holding my hand. You were always there.

But lately, I have been thinking about our friendship and also reading about it. Some of my other friends (Yes, I eventually made some) told me you are a bad influence. I had a difficult time understanding why would they see you as any different from me. But upon educating myself and surrounding myself with some really beautiful people, I realized we were in this constant power struggle of who would take control of my life. But I think it’s time for me to go with life wherever it takes me, without you. Now, I leave on this journey to ‘Emotional Maturity’, I have to distance myself from you.

I know you will want to make a comeback at different struggles of my life the way you have been invading my mind for so many years, and I will be expecting you to do that.  You can enter my head, have a seat, sip a cup of tea with me, but you will have to leave soon because I am not gonna be a harbor anymore. I am taking charge of my life now.

Yours Sincerely,
Young Adult (Supposedly on the way to emotional maturity)

Note: This piece was originally written by me for breathercare.in

दुष्चक्र

आंखें बोली आंसू से तुम क्यों थम गए भाई
उम्र बड़ी तो क्या हुआ अब भी जारी है दिलो दिमाग की लड़ाई…

आंसू बोला दिल से पूछो उसने कितनी बातें छुपाई
दिल ने दिमाग को दोषी ठहराया, कहा उसने दी थी
समझदारी की दुहाई ।

बुली भैया

बुली भैया
9th में होंगे
जब हम 4th में थे
ऑटो में उनका एक छत्र राज था
कोने वाली सीट पर बस उनका ही अधिकार था
वह कूटनीती के ज्ञाता थे
अंडरटेकर वाली कूटनीती के
जब मौका मिलता हमें कूट देते थे
ऑटो में उनको बैग टच हुआ तो
कूट दिया
उनके जोक पर हम हंसे नहीं तब
कूट दिया
उनके लिए दो वाली पेप्सी नहीं लाए तो
कूट दिया
अगले साल उनके पापा का ट्रन्सफर हो गया
और हम सबने मिलकर पास के हनुमान मंदिर
में दो वाली पांच पेप्सी चड़ाई
खैर, आज उन्होंने मेंटल हेल्थ पर लम्बा स्टेटस डाला
उसमें उन्होंने लिखा बचपन में कैसे उनके पापा का
गुस्सा मम्मी पर निकलता था, मम्मी का उनपर
और फ़िर उनका हमपर…
पितृसत्ता के इस चक्रव्यूह को क्या मेरा उनके
स्टेटस पर दिया एक लाइक तोड़ पायेगा

Aadarniya Whatsapp Uncle

Aadarniya Whatsapp Uncle,
Asha hain aap sakushal honge,
Sabse pehle toh Whatsapp ki taraf se Bharat ke rashtragaan ko sarvashreshta rashtragaan milne ki shubhkaamnaayein
Aap aise hi agar Harr Harr Chokidaar ki maala japte rahenge aur Congress ko niyamit roop se din main 4 baar gaali dete rahenge  (Jabki jab wo asal main gadbad jhala kar rahi thi, aap galle pe baithe the)…Tabhi yeh desh acche dino ki aur agrasar hoga
Thode din pehle Chintu se baat hui, usko aapne MBA ke liye America bhej kar bahut accha kiya, kam se kam wahaan wo #BlackLivesMatter ka board leke toh khada hai nahi toh yahaan IIT main selection na hone par bade bade Anti reservation rant daal raha tha…
Sudhir aur Amish bhai aapke hospital ke kharche ki baat karein na karein,  deshbhakti ka bharpoor khayal rakh rahe honge…
Kuch dino se ek shanka mann main yoga kar rahi hai…uss din aapne subah subah Buddha ka quote daala aur shaam tak saare Markaz waalon ko khatam kardo ka forward bheja, Kuch samajh nahi aaya… shayad shaam ko aap economy badha rahe honge kaaju ke saath…
Kaaju se yaad aaya…wo uss din aapne lockdown main pehli aur aakhri baar #CookForYourWifeChallenge main jo moong ke pakode banaye the uski recipe zaroor bhejiyega
Sorry sorry maine aapka zyada waqt le liya… Aapko toh Whatsapp pe 21 logon ko China Ka Asli Sach forward bhi karna hoga…
Toh abhi ke liye main vida leta hun…
Sabko yaad kijiyega
Khaas Karke Gau Mata ko

Aagyakaari Anti National,
Aap jiska lifafa 501 se 101 karne waale hain wo waala ladka

बॉम्ब स्क्वाड का कुत्ता


एक बार बॉम्ब स्क्वाड के कुत्ते से मैंने पूछा
तुम्हें बारूद ढूंढते हुए
इब्राहीम के इत्र की खुशबू अायी
या शिव के धतूरे की
वह गुराया…
मैं पीछे हटा
उसने गुस्से में जवाब दिया
मुझे तो बस
उन दोनों के बीच
नफ़रत फैलाने वाले
की बदबू अायी।

सपनों के बीज

हम सब अपने सपनों को बोते हैं
पर सबकी ज़मीन एक सी नहीं होती
सबको एक सी धूप नहीं मिलती
कांटे सबके हिस्से आते हैं
पर सबको माली की मदद नहीं मिलती

अकेले रहकर भी जो ठान ले तो
कांटों में भी गुलाब उगादे
साथ मिलने पर भी जो भटके तो
सूरजमुखी की भी चमक लुटा दे

लहलहाकर खुद
कभी जो सहरा दे दूसरों को तो
सदियों तक अपनी महक फैलाए
कभी जो कुचल दे तो
चंद महीनों में खुद सड़ जाए

हम सब अपने सपनों को बोते हैं

नशे में धूत

जब हम लाखों टन अनाज को सड़ते देख कुछ नहीं कहते,
जब उस लाखों टन सड़े अनाज को शराब में घुलते देख कुछ नहीं कहते,
तो हम सब बिना पिये नशे में धूत हैं
और नशे में धूत लोगों को अपनी लाचारी नहीं दिखती
दूसरों की लाचारी की बात तो छोड़ ही दीजिए…

सच

सच
सच के मायने बदल गए हैं
हम बस दो सच ही समझते हैं
पहले ही माना हुआ सच
दूसरों को झूठलाता सच
हमने अपने मन के एक तरफ काली
और एक तरफ सफेद स्याही पोत ली है
फिल्म में, टीवी में, इंटरनेट पर
सब जगह हम
अपने माने हुए सच को
और सच बनाने के
तरीक़े खोज रहे हैं
ताकि दूसरों की नज़रों में
जब खुद को देखें
तो हमारा कद ऊंचा लगे
हमारे अहम का कद
और जब अहम का कद
बढ़ जाता है
तो चीज़ें धुंधली दिखाई देती है
दिन दहाड़े किया गया खून
स्वाभिक मृत्यु लगने लगता है
इंडिया के स्टूडेंट्स
भारत के गुनाहगार लगते हैं
और खून पसीने से बना इंसान
अख़बारों में छपने वाला
एक सरकारी आंकड़ा

जुमला और हमला

चुनावी मौसम में
नेताजी ने लगाया
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”
का नारा
बेटी पढ़ी
आगे बढ़ी
उनकी गलतियों के ख़िलाफ
बेटी की आवाज़ उठी
तो जवाब में
नेताजी बोले
बेटी वो नारा नहीं था
था एक जुमला…
हमसे सवाल करोगी
तो हो जाएगा
तुम्हारी आज़ादी पर हमला

Courtesy: The Wire

On Friday, Natasha Narwal joined the list of students of falsely accused with UAPA for protesting against CAA & NRC and instigating Delhi Riots while the real perpetrators are on getting trained to become future MLAs and MPs.

The other students include:

1. Safoora Zargar

2. Meeran Haider

3. Asif Tanha

4. Debangana Kalita (Not charged UAPA but sent to Tihar Jail)

चिड़िया और पेड़

एक बार मैंने अपनी बालकनी से एक पेड़ और चिड़िया की बात सुनी, उसी के कुछ अंश।

पेड़: बात मान…मैं बोल रहा हूं ना,उड़ जा

चिड़िया: आप ही बताओ कैसे जाऊं, अभी तो बच्चों को ढंग से उड़ना तक नहीं आया है

पेड़: तू बात को समझ नहीं रही है, वो तो लाकडाउन की वजह से मैं अब भी खड़ा हूं

चिड़िया: नहीं तो…

पेड़: नहीं तो यह इंसान मुझे अर्बन डेवलपमेंट के नाम पे काटने का प्लान कर रहे हैं

चिड़िया: हां पर अब तो यह समझ जाएंगे ना यह पृथ्वी हमारी भी है

पेड़: अरे मैं बहुत साल से देख रहा हूं, इनमें से बहुत कम को ही हमारी फ़िक्र है, बाकी सब तो लालची थे और लालची रहेंगे

चिड़िया (चिंतित): तो मतलब मेरा घर भी उजड़ जाएगा

पेड़: इसलिए तो कह रहा हूं उड़ जा…

चिड़िया ने पेड़ की बात मान ली, और अपने बच्चों के साथ उड़ने की प्रैक्टिस शुरू कर दी, मगर जल्दी सीखने के चक्कर में एक बच्चा बिजली के तार में फंस गया और उसके पंख पर चोट लग गई और वो बीच रास्ते में गिर गया। यह तो अच्छा था कि लाकडाउन के कारण रास्तों पर गाड़ी नहीं थी वरना… अब चिड़िया की घबराहट और बढ़ गई। वो जैसे तैसे अपने बच्चे को पेड़ की सबसे नीची  डाली तक ले जा पाई।

तभी एक मजदूर की नजर उस पेड़ पर पड़ी और वह उसके नीचे आराम करने बैठ गया। उसकी हालत बहुत खराब थी, वो कुछ 250 मील की पैदल यात्रा करके यहां तक पहुंचा था और अभी उसे 200 मील और चलना था। उसके बदन पर कुछ लाठियों के निशान थे और उसके बदन से केमिकल की बदबू आ रही थी। बीच रास्ते में भले लोगों ने बिस्किट के पैकेट और पानी की बॉटल भी दी थी, मगर अब उसमें दो बूंद पानी बचा होगा। उसने पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश की मगर उसके अंदर इतनी शक्ति नहीं बची थी कि वह फल तोड़ पाए। आखिर में थक हार कर वो बैठ गया और रोने लगा। अपने रोने में उसे किसी और के रोने की भी आवाज़ अायी।

वो उठ खड़ा हुआ और आस पास देखने लगा…

मजदूर: कौन है

पेड़ हिलने लगा और मजदूर डर गया मगर उसने जैसे ही भागने की कोशिश की, वो गिर गया

पेड़: भैया यह चिड़िया रो रही है, में पेड़ बोल रहा हूं

मजदूर (पीछे रेंगते हुए): कौन… कौन है, भूखे के साथ क्यों मज़ाक करते हो।

पेड़: हम क्यों मज़ाक करेंगे, हम खुद ही परेशान हैं

मजदूर: अच्छा तुम पेड़ बोल रहे हो तो फल गिरा कर बताओ

पेड़ और ज़ोर से हिलने लगा और उस पर से एक फल गिरा। मजदूर ने झट से उस फल को उठाया और दो बूंद बचा पानी डाला और उसे खाने लगा।

मजदूर: धन्यवाद पेड़… मगर यह चिड़िया क्यों रोती है, उसे हमारे जैसे चलना कहां है… वो तो जहां चाहे उड़ सकती है, जो चाहे खा सकती है

पेड़: भैया अर्बन डेवलपमेंट का नाम सुना है

मजदूर: अरे नाम मत लो उस राक्षस का, शहर के एक किनारे पर मैं सालों से झोपड़ी में रह रहा था, पर अचानक पहले तो इस लोकडाउन ने काम बंद कराया फिर एक दिन झोपड़ी खाली करने को कह दिया, बोले झोपड़ी तोड़कर, पास के नाले को साफ कर, सुंदर झील बनाएंगे, वो भी लोकडाउन के बीचों बीच।

पेड़: अरे तुमने तो पूरी गाथा ही गढ़ दी, पर बिलकुल यही काम इस चिड़िया के साथ भी होने वाला है

मजदूर: मतलब…

पेड़:इसके घर को भी थोड़े दिन में कुछ लोग बिना बताए उजाड़ने वाले

मजदूर: इसके घर को तो मतलब… तुम्हें… तुम्हें काट रहे हैं

पेड़: और मेरी जगह बिजली का खंबा लगाएंगे…

मजदूर: …

चिड़िया (सांस भरते हुए): और मैंने यहां से जाने की कोशिश की तो मेरा बच्चा ज़ख्मी हो गया

मजदूर फल खाते खाते रुक गया और कुछ सोचने लगा… थोड़ी देर बाद उसने अपने सामान में से एक टोकरी निकाली

मजदूर: एक काम करते हैं, चिड़िया तुम अपने बच्चों को इसमें रख लो।

चिड़िया थोड़ी डर गई

पेड़ (मजदूर से): क्यों भला?

मजदूर: अरे डरो मत! हमारे गांव में बहुत से पेड़ हैं, वहां उसे नया घोंसला बनाने की भरपूर जगह मिलेगी

चिड़िया: और मैं तुम पर विश्वास क्यों करूं

मजदूर: पहली बात तो घर टूटने का दर्द मैं जानता हूं, दूसरी बात पेड़ ने मेरी जान बचाई है, इतना तो मैं कर ही सकता हूं

पेड़ खुशी के मारे ज़ोर से मचलने लगा और उसने आठ- दस फल और गिरा दिए

पेड़: रास्ते के लिए यह रख लो

चिड़िया: पर पेड़ का क्या होगा

पेड़: अरे मेरी फ़िक्र छोड़ अब

मजदूर: ऐसे कैसे छोड़ दें, गांव पहुंचकर सबसे पहले अपने आंगन में तुम्हारे बीज लगाऊंगा और फिर तुम्हारी अच्छे से देख रेख करूंगा

चिड़िया खुश हो गई…उसने पेड़ को अलविदा कहा और उसे शुक्रिया किया

पेड़: भैया सुनो, चिड़िया ना रास्ते भर के पेड़ों को जानती है, जब भी यह फल खत्म हो जाए, दूसरे पेड़ भी तुम्हें खुशी खुशी फल दे देंगे और बीच में अाई नदियों से तुम पानी ले पाओगे।

मजदूर ने पेड़ को सीने से लगाया और उसमें एक नई सी शक्ति आ गई। वह चिड़िया और उसके बच्चों को टोकरी में ध्यान से रखकर गांव की ओर चल दिया ।

सूरज ने यह सब देख, अपना ताप उस दिन के लिए थोड़ा कम कर दिया।
———————

नोट: अगर आपने यहां तक पढ़ने की हिम्मत करी है तो इस बात को आप मानते होंगे कि प्रकृति से हम हैं, ना की हम से प्रकृति। यह लेख लिखने के दो कारण हैं-  जब हम लोग लॉकडाउन में घर के अंदर हैं, चंद शाक्तिशाली और लालची लोगों ने

1. ‘अमेज़ोन ऑफ द ईस्ट’ कहे जाने वाले देहिंग पतकाई वाइल्ड लाइफ संक्चरी में कोयला खनन की अनुमति देकर, 270000 पेड़ों और असंख्य प्रजातियों के पशु पक्षी को खतरे में डाल दिया है।

2. कुछ दिनों पहले यह घोषणा हुई है कि पश्चिमी घाट पर रेल लाइन बिछाने के लिए 220000 पेड़ों को काटा जाएगा।

अगर हम प्रकृति का ख्याल नहीं रखेंगे तो वो कैसा विनाश कर सकती है, यह आपको ओडिशा और बंगाल की हालत देखकर समझ आ गया होगा। इसलिए हम सब को इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। पशु पक्षी, पेड़ और इंसान को साथ आगे बढ़ना है नहीं तो हमारा विनाश बहुत दर्दनाक होगा। ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाएं और जहां भी पेड़ कटने की खबर आए उसके खिलाफ आवाज़ उठाएं।

धन्यवाद।

Cover Art: Vaisakh Manoharan

यह कैसा समय है? (हिन्दी अनुवाद)

Original – What Kind Of Times Are These? By Adrienne Rich

नोट: यह शब्दशः अनुवाद नहीं है, रूह को पकड़ने की कोशिश है ।

यहां से कुछ दूर पर एक जगह है, जहां दो रास्ते मिलते हैं,
एक रास्ते पर दो काफ़ी लंबे पेड़ों के बीच हरी घांस अब भी उग रही है
और दूसरे रास्ते पर क्रांतिकारी आवाज़ें बीते हुए कल के अंधेरे में शांत हो गई है
उन दोनों रास्तों के बीचों बीच आवाज़ उठाने वाले लोगों के मिलने का एक कमरा है, जहां सालों से कोई नहीं आया
वो लोग भी अपनी आवाजों की तरह कल के अंधेरे में कहीं गायब कर दिए गए हैं

मैं कई बार उस डर की सीमा तक फल तोड़ने गया हूं,
यह गलतफहमी मत पालना की मैं कोई रूसी कविता पढ़ रहा हूं, ये जगह और कहीं नहीं…यहीं है,
हमारा देश प्रतिदिन खुद ही के सच… डरवाने सच की ओर बढ़ता जा रहा है
यहां के अपने तरीक़े हैं लोगों को…आवाज़ उठाने वाले लोगों को गायब करने के

मैं तुम्हें यह नहीं बताऊंगा कि यह जगह कहां है, जहां एक कण उजाले को भी अंधेरे के जाल में फंसाया जाता है-
भूतिया चौराहे, हरे भरे  उपवन जैसे बेचे जाते हैं
मुझे तो पहले ही पता है, कौन उसे खरीदता, बेचता और गायाब करता है

पर मैं तुम्हें यह नहीं बताऊंगा कि यह जगह कहां है,
फिर मैं तुमको बाकी सब क्यों बता रहा हूं?
क्योंकि मुझे पता है कि तुम अब भी सुन रहे हो,
क्योंकि इस भयावह समय में तुम्हारा सुनना ही सबसे
ज़रूरी है…
पेड़ों के बारे में ध्यान से सुनना और घास की तरह उगते जाना सबसे ज़रूरी है

अंग्रेज़ी में यहां पढ़े- https://www.poetryfoundation.org/poems/51092/what-kind-of-times-are-these

स्थिरता और बदलाव

मेरे दादा को बदलाव पसंद नहीं
उन्होंने शायाद इतने उतार चढ़ाव देखें हैं
की वो हर चीज़ में एक स्थिरता खोजते हैं
मेरी मां को स्थिरता से ऊब जाती हैं
उन्होंने अपने शुरू के जीवन में ऐसा अभाव देखा है
जिसे बदलाव से ही पूरा किया जा सकता था
इस रोज़मर्रा के द्वंद्व के बीच एक आदमी खड़ा है
जिन्हें मैं पापा कहता हूं।

रोटी, कपड़ा और मकान

सड़क पर निकले तो
दवाई छिड़क दी,
रेल की खिड़की में
नंगे बदन से भी पैसा मांग लिया
ट्रेन शुरू हुई तो बिल्डर्स के साथ मीटिंग करके
मजदूरों को कैद कर लिया गया
उनके जाने पर रोक लगा दी
क्या ताकतवर अपनी बची कुची शर्म
डोलोगाना कॉफी में मिला कर पी गए
उनका क्या कसूर है
यही की वह हमारे घर बनाते हैं
हमारे लिए अनाज उगाते हैं
या हमारे कपड़े बुनते हैं
हमारा रोटी, कपड़ा, मकान
तीनों उनसे ही आता है
और हमने उनसे ये ही नहीं
उनका सम्मान भी छीन लिया

सपनों का किनारा

सपनों के किनारे पे बैठे थे तीन यार
एक के लिए बाप दादा का बड़ा जहाज आया
और वो विदेश निकल लिया
दूसरे के लिए एक नाव अाई
जिसे उसके मां और पिता ने
बड़ी मेहनत से बनाया था
दूसरा उसमें बैठा और बड़े शहर
निकल लिया
तीसरे ने इंतजार किया
सोचा कोई तो आएगा
कोई आया तो सही
पर उसे धक्का देकर चला गया
थोड़ी देर छटपटाने के बाद
वो तैरना भी सीख गया
उसे पता था अभी
दूसरा किनारा दूर है
पर वो तैरता रहा
बस तैरता ही रहा
और खुदकी मेहनत से
जिस दिन वो दूसरी ओर पहुंचा
वो ना बड़ा शहर था ना दूसरा देश
वो एक ऐसी दुनिया में पहुंच गया
जहां सागर का पानी तक
भी मीठा होता था

Featured Image- The Great Wave Off Kangawa by Hokusai

Untied Laces

I close my eyes
To find words for this poem
And I see a 10-year old kid
Of ‘5th E’ eating his tiffin
Alone in the class
Sitting in the library alone,
Limping in the corridors
When the other kids ran
After the last school bell
I don’t know why is he alone
Maybe that’s how he felt
All his school life
When only the special shoes
He wore
Were his friends
‘Real Friends’
Special shoes
Laces of which
Were always untied
Like the rhythm
Of these lines

A Rifle And A Bag

 

On the Bandra-Mahim junction, there is a very famous statue with a quote by Dr V.V. Kamat- ‘A child gives birth to a mother’. The documentary, ‘A Rifle and A Bag’ by Arya Rothe, Cristina Hanes and Isabela Rinaldi amongst other things encapsulate the quote very beautifully. The film is an intimate portrayal of Somi, a former Naxalite who surrendered along with her husband with the hope to provide a better life for their two children. It is based in a camp in interior parts of Maharashtra set up by the government for former Naxalites.


Now, first of all, let me be clear, I know very little about the Naxalism in India but on a simple google search, I found that it is considered as a greater danger than terrorism by the establishment, as it is currently affecting around 22 states of our country. There are polarizing articles almost preaching Pro Naxal and Anti Naxal narratives. I am still trying to understand the various forms of oppression, the origin of it and their current state in our country. Nevertheless, what I think (in all my naivety) is the first step towards fighting any oppression is imparting education and Somi understands it more than we do. That’s what she fights for throughout the film.


But does anyone care, especially when you are on the wrong side of the margin. The powerful make laws and put in systems to pretend that they are helping. But in turn, what they are creating is a more complex maze that will leave the oppressed bewildered. Standing in ATM Lines, Standing in line to prove their identity or walking miles to reach home in a pandemic without adequate food, the biggest sufferers are always the marginalised.

A screenshot from the film


Despite all this, this film rarely catches Somi in a vulnerable state. She sings songs of resilience around the fire every night to find the inner strength to keep up her fight. The silences between the family conversations tell more about the relationship of Somi and her husband (much younger to her) than words could ever express.


One of the most important aspects of a documentary film set up your relationship with the protagonist, both while making and watching. Kudos to the makers for making us believe that we are a part of Somi’s journey. The frames created by the makers also try to supplement what is going on in her mind. The frontal framing seems very deliberate so that Somi looks in control of the situation. Rarely, when she is anxious and uncertain, it is shot in the cramped and dingy space of the camp mostly at night. In the later moments of the film, when she opens up to her son a bit, it is shot in a wide landscape with a picturesque background.


All in all, A Rifle and A Bag somehow tries to break the pro-Naxalite and anti-Naxalite narrative often dangerously looming to the level of propaganda. It presents the problem in a humanistic and relatable manner by showcasing a mother’s journey trying to get the best life for his child.


The filmmakers Arya Roth from India, Isabella Rinaldi from Italy and Cristina Hanes from Romania graduated from the Doc Nomads Program and make films under the banner of ‘NoCut Film Collective’. Here’s hoping their camera remains this honest in their next project and inspire young filmmakers like us.


The online screening of this film is happening worldwide till 7th May on https://online.visionsdureel.ch/

PS: Thanks to Suyash Kamat for tweeting about it.

I Write Because

I write because

When I put pen to paper

I can be a tree’s trembling heart

When an axe is about to hit it

Or a dog’s warm heart

When his Papa returns every night

I can be my old man’s weak heart

Living his last days

Or a little girl’s cheerful one

When she sings in the shower

I can be an artist’s burning heart

Trying to change the world

Or an athlete’s racing heart

Trying to win the world

I write because

I can be all heart

And nothing more

God’s Home

Do you really think God lives in a building with four walls?

Buildings with 20-feet walls which have inscription of His own stories

Do you really think He is so self-obsessed?

Buildings that have pillars craved with women bowing down at the entrance

Do you really think He is a misogynist?

Buildings that doesn’t let certain section of society to enter based on their caste, creed, religion or gender

Do you really think He is a bigot?

Think harder

Is He really so self-obsessed, misogynist and a bigot or

The builders of these places are

For God…

I think He loves to work from home

And His home is every heart that has ‘Kindness’ inscribed on it

जान और संसद

एक आदमी
जान से मर रहा है
एक आदमी जान बचा रहा है
एक तीसरा आदमी भी है
जो ना जान बचाता है, ना कोशिश करता है
वह सिर्फ़ दूसरों की जान से खेलता है
मैं पूछता हूँ–
‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’
मेरे देश की संसद मौन है।

  • धूमिल की कविता रोटी और संसद से प्रेरित

टफी जी और लॉकडाउन

नेताजी की पत्नी जब ब्याह कर आयी तो अपने संस्कारों का प्रमाण पत्र, टफी जी के रूप में लेकर आई । एक बहुचर्चित फिल्म के कारण दुनिया के सारे ‘टफी’ सबसे संस्कारी कुत्ते कहलाने लगे थे। उस फिल्म के हीरो को भी जानवरों से खूब प्यार था। खैर वो तो किसी और दिन की बात है। अभी आते हैं टफी जी पर, जिनको नेताजी अपने बच्चे से ज़्यादा चाहते थे, अब बच्चा तो आगे या पीछे अब्रॉड ही सैटल होने वाला था, टफी जी ही नेताजी के श्रवण कुमार थे इसलिए उनकी खिदमत बिलकुल राजकुमारों जैसे होती थी। उनके खाने का मासिक खर्च नौकर की सैलरी से दुगना था। टफी जी को भी अपने मम्मी डैडी की सेहत का खूब खयाल था, इसलिए उन्होंने भौंक भौंक कर बंगले की पीछे की जमीन पर टहलने के लिए एक बाग़ बनवाया, जो सरकारी कागजों में कोई स्कूल बनाने के लिए अलॉट हुई थी। खैर स्कूल बनाके किसने चुनाव जीता है?…टफी जी हाई मेनटेनेंस की चरम सीमा पर मूतते थे, वे टांग उठाते भी थे तो सिर्फ सरकारी गाड़ी के टायर के सामने या सरकारी जीप की सीट पर। एक बार तो भूचाल ही आ गया था जब टफी जी ने सीट पर किसी हरे पट्टे वाले कुत्ते की बू सूंघ ली। ड्राइवर की नौकरी तो गई ही, पर सारी मीडिया के सामने एक शुद्धिकरण की पूजा भी कराई गई।

एक दिन टफी जी को बाग़ में घूमते हुए एक छिंक आई और नेताजी ने अपने इलाके में लॉकडाउन की घोषणा की। फिर टफी जी को नाश्ते में वो काजग खिला दिए जो पांच हफ्ते पहले WHO से आए थे। एक तरफ नेता जी ने आवारा कुत्तों की मदद के लिए योजना तैयार की और दूसरी तरफ टफी जी को इन्फ्लूंसर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। एक तरफ फंड आते गए, दूसरी तरफ टफी जी लोगों को डोग हाउस बनाना सीखाते गए। जब PPE kit नेता जी के पास पहुंचे तो एक एन९५ मास्क टफी जी के भी हिस्से आया, बहुत से डॉक्टर्स के पहले। देश के सबसे बड़े न्यूज चैनल ने टफी जी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लिया पर बीच इंटरव्यू में उन्हें लघू शंका हुई और वह बाग़ की तरफ भागे जहां नेताजी की नई मूर्ति बन रही थी, बस फिर क्या था टफी जी ने टांग उठाई और…

मध्य प्रदेश और कोरोना

कहानी शुरू होती है दिल्ली से
जब नेताजी ने विधायकों की बोली लगाई
और टीवी पर बोले, ‘कोरोना वोरोना कुछ नहीं होता’
सियासी मूजिकल चेयर में
जनता का तानपुरा बजना शुरू हुआ
दूसरी तान दी,
वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले लोगों ने जिन्होंने २०२० में ना जाने कौनसा वर्ल्ड कप जीता
तीसरी तान दी मौलवी ने
जिसने धर्म की ऐसी गलत पट्टी पढ़ाई
की टिकटोक भाग्यविधता बन गया
और जाहिलों ने डॉक्टर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी
और आखिर में सबसे ऊंची तान दे रहे है
स्वास्थ के व्यापारी जो इस खतरे के समय भी
टेस्टिंग की गति बढ़ाने के बजाए
व्यापम के एहसान गिना रहे हैं
और लोगों की जान को धंधा समझ बैठे हैं,
इस मूर्खता के शोरगुल के बीच
मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारी, पोलिस
मजदूरों को खाना पहुंचाने वाले लोग
पीपीई किट वितरण करने वाले लोग
और आप सब जो घर में बैठें हैं
उन्हें मैं प्रणाम करता हूं
एक दूसरे का ख्याल रखें
ज़ी न्यूज़ हटाकर ज़ी सिनेमा देखें
वॉट्सएप पर मूर्खता से दूर रहें
और हाथ धोते रहें।

Heart Inc.

When we are in love
With oneself or someone else
There are some workers in our heart
Who process everything we feel
Into a thing of beauty
But when our heart is broken
Does these workers go on a lockdown
Does the creation of beauty comes to a halt
Not really,
It just slows down
As the workers now divide
One half keep creating beauty
Stimulated by
Memes sent by friends
While the other half
The experienced ones
Discover dingy pathways
Inside our heart
Where fear feeds on hate
And start cleaning it with tears
And a bucketful of ice-cream
This bigger the heart,
The more time it takes to cleanse it
And sooner or later
The ones creating beauty
Feel someone
It can be him or her
Or a newer version of self
Who lights up those dingy pathways
With just a smile
So that the experienced ones
Return to what they do best
Creating beauty

राम रामलाल

वह चला था चौदह बरस तक
अब उसे तुम चार दिवारी में बंद कर
उसके नाम पे लड़ कर धंधा खोलना चाहते हो
और उसे धर्म बताते हो
जब कर रहे हो उसका १००८ बार गुणगान टीवी के सामने
कोई रामलाल पैदल ही जा रहा है १००८ किलोमीटर अपने परिवार के पास
तुम पूछते हो मैं तो घर में बैठकर क्या कर सकता हूं
मैं कहता हूं खोल दो उसके लिए मंदिर के दरवाज़े
और बिताने दो रामलाल को कुछ रात वहां
मगर तुम फिर तपाक से कहोगे
हमारा मंदिर अपवित्र हो जाएगा
पवित्रता का दोगुलापन कहीं और दिखाना
उस रामलाल ने ही तुम्हारे मन्दिर को ईंट पत्थर जोड़ कर बनाया है

सवाल करते रहो

कुछ साल पहले
शायद इमर्जेंसी के समय
मेरे पापा कुछ १५ साल के रहे होंगे
तब उनके एक दोस्त ने उन्हें एक कविता पढ़ने को दी
ओम प्रकाश वाल्मीकि की
मगर जैसे ही दादा ने देखा उन्होंने वह फट से छीन ली
और कूड़े में फेंक दी
और कहा यह सब मत पढ़ा कर
चल रामायण पढ़
उसमें भी तो राम शबरी के झूठे जामुन खाते हैं
देख कितने निष्पक्ष हैं वो
खैर वो कविता एक कूड़ा बिनने वाले को मिली
वो भी करीब करीब मेरे पापा जितना ही था
उस बच्चे को एक भला आदमी
शायद बुद्ध का अनुयायी
रात को पढ़ाता था
उस बच्चे ने यह कविता को अपने घर की दीवार पर लगा लिया
ना जाने कितने घर टूटे,
कितने जले
कितनी बार उसने रिजर्वेशन की लड़ाईयों में
इसे पढ़ा
अंधी सरकारें और अंधी होती गई
गूंगे बहरे लोगों ने अपने दोनों कान
नोटों की गड्डी से भर लिए
मगर सब लड़ाइयों में उसका एक ही हथियार था
वह कविता
एक दिन ऐसा आया
की वो बच्चा एक प्रोफेसर बना
और मैं उनसे पढ़ने गया
उन्होंने कहा रामायण भी पढ़ो
ओम प्रकाश वाल्मीकि भी
दोनों में जो अच्छी सीख है वो लो
और सवाल करते रहो
वह नेता जिन्हें तुम राम का स्वरूप मानते हो
दलितों के घर खाना खाकर,
अख़बार के लिए फोटो खिंचाकर
खुदपर गंगाजल क्यों छिड़कता है?

     

I Wanna Leave Your Hand

Oh yeah, I’ll tell you something
I think you’ll understand
When I’ll say that something
I wanna leave your hand         
I wanna leave your hand
I wanna leave your hand

Oh yeah, I’ll tell you something
I think you’ll understand
When I’ll say that something
I wanna leave your hand         
I wanna leave your hand
I wanna leave your hand

Oh please, say to me
You’ll be a bit humane
And please, say to me
You’ll leave my hand
I’ll leave your hand
I wanna leave your hand

And when I touch you, I feel terrified
Inside
It’s such a feeling that my love
I sanitize
Sanitize
Sanitize

Oh yeah, I’ll tell you something
I think you’ll understand
When I’ll say that something
I wanna leave your hand         
I wanna leave your hand
I wanna leave your hand

Inspired by I Wanna Hold Your Hand- The Beatles